About

शायर एवं कवि समाज का वो अटूट अंग है जो मानवता का संदेश और इंसानियत का पैगाम देकर समाज को सुखी बनाने का सपना देखता है और उसी सेवा के चलते हृदय सम्राट बनकर समाज में धड़कता रहता है ।

यदि किसी इंसान को कोई कष्ट या दुख पहुंचता है तो वह अत्यंत दुखी एवं पीड़ित होकर बिलबिला उठता है और अपने शब्द-रचनाओं में उसी का वर्णन करते हुए समाज को जीवन-दर्पण दिखाता है जिसमें प्रेरणा की सरिता हलकोरे मारती हैं और संसार को प्रेरित करती हैं।

मैं पंकज सिद्धार्थ भी उसी सामाजिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परिवार का एक सदस्य हूं । महात्मा गौतम बुद्ध की पवित्र धरती (सिद्धार्थनगर) पर ज्योति जगाने का कार्य सर्वप्रथम अपना धर्म समझता हूं । ताकि आने वाली पीढ़ी को एक नया प्रकाश प्रदान कर सकें । जिससे यह धरती स्वर्ग समान हो सके ।

जीवन के कठिन से कठिन मोड़ से गुज़रना,आकाश छूने की अभिलाषा ही हमारा जीवन-संघर्ष है । प्रिय पाठकों से भी यही आशा है । आइये हम सभी एक साथ मिलकर इस आवाज़ को बुलंद करें और एक दूसरे के दुख-दर्द में काम आएं और इस सुनहरे सपने को साकार बनाएं ।